एक कर्मठ, अडिग क्रान्तिकारी की विरासत को नेस्तनाबूद किये जाने से बचाने की अपील
इस देश में, ख़ासकर हिन्दी भाषी क्षेत्र में, वामपंथी बुद्धिजीवियों, संस्कृतिकर्मियों, लेखकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं में से कम ही ऐसे होंगे जो बच्चों के मोर्चे पर 'अनुराग ट्रस्ट' द्वारा किये जा रहे...
View Articleस्त्री मज़दूरों और उनकी माँगों के प्रति पुरुष मज़दूरों का नज़रिया -1
-- कवितान सिर्फ़ आम मज़दूरों में बल्कि ज्यादातर आगे बढ़े हुए और जुझारू चेतना वाले मज़दूरों में भी स्त्री मज़दूरों की माँगों के प्रति सहानुभूति या समर्थन के रवैये का अभाव दिखायी देता है। चाहे...
View Articleफ़ैज अहमद फ़ैज की दो नज़्में
इधर न देखोइधर न देखो कि जो बहादुरक़लम के या तेग़ के धनी थे,जो अज़्मों हिम्मत के मुद्दई थे,अब उनके हाथों में सिंदक़ो-ईमां कीआज़मूदा पुरानी तलवार मुड़ गई हैजो कजकुलह साहिबे-हशम थेजो अहंले-दस्तार...
View ArticleArticle 21
''सच है, क़ानून बुर्जुआ वर्ग के लिए पावन-पवित्र होता है, क्योंकि यह उसी की रचना होता है और उसी की सम्मति से, और उसी के फ़ायदे तथा उसी के हिफ़ाजत के लिए, लागू होता है। वह जानता है कि, यदि कोई एक...
View Articleस्त्री मज़दूरों और उनकी माँगों के प्रति पुरुष मज़दूरों का दृष्टिकोण - 2
पुरुष मज़दूर अगर बहुत संकीर्ण दायरे में सोचेंगे और केवल अपने तात्कालिक आर्थिक हितों को ही देखते रहेंगे, अगर वे व्यापक से व्यापकतर स्तर पर संगठित होकर अपने आर्थिक एवं राजनीतिक अधिकारों की हिफ़ाजत एवं...
View Articleआने वाले चुनाव और ज़ोर पकड़ती साम्प्रदायिक लहर
इस बार दंगा बहुत बड़ा था ख़ूब हुई थी ख़ून की बारिश अगले साल अच्छी होगी फसल मतदान की। - ग़ोरख पाण्डे देश में 2014 में आम चुनाव होने हैं। हिमाचल विधान सभा के चुनाव हो चुके हैं; (नतीजे 20 दिसम्बर को...
View ArticleArticle 18
इसलिए, कोई भी चीज़ हमें नहीं रोकती कि हम अपनी आलोचना की शुरुआत राजनीति की आलोचना से करें, राजनीति में पक्ष लेने से, और इसतरह वास्तविक संघर्षों से, और उनके साथ अपनी पहचान जोड़ने से करें। तब हम कोरे...
View Articleप्रगति का रास्ता एक, पर पतन की राहें अनेक होती हैं
काफ़ी हाउस में रिटायर्ड क्रान्तिकारियों का एक जमावड़ा देखा। अब सभी अलग-अलग धन्धे-पानी में लगे हैं। कोई एन.जी.ओ. में है, कोई दिल्ली यूनिवर्सिटी में, कोई मीडिया में, कोई सरकारी मुलाज़मि है, कोई...
View Articleकविता पोस्टर - 2
(स्त्री मुक्ति लीग की कविता पोस्टर श्रृंखला का पोस्टर-2)जो रोज सड़कों पर या बन्द दरवाज़ों के पीछे बर्बरता की शिकार हो रही हैं, जो रोज़ जलाई जा रही हैं या फाँसी चढ़ाई जा रही हैं दहेज के लिए या...
View Articleदिल्ली पुलिस की ''हेल्पलाइनों'' की कड़वी असलियत - एक अनुभव और एक अपील
दिल्ली के बर्बर इस क़दर बेख़ौफ़ क्यों?दिल्ली पुलिस की ''हेल्पलाइनों''की कड़वी असलियत - एक अनुभव- कविताकोई भी यह उम्मीद करेगा कि 16 दिसंबर के गैंगरेप की बर्बर घटना और उसके बाद उमड़े जनआक्रोश के...
View Articleस्त्रियों के लिए दिल्ली पुलिस और उसकी ''हेल्पलाइनों'' से 'हेल्प' मिलना...
गूंगी बहरी सरकार,लचर कानून व्यवस्था,बेखौफ अपराधीएक महिला सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत पर चार दिन बाद भी कार्रवाई नहीं - कवितादिसंबर के गैंगरेप की बर्बर घटना के बाद उमड़े जनआक्रोश के बावजूद पुलिस और...
View Articleघटनाएं घटने का इंतज़ार करती हैं सरकारें और उसका प्रशासनिक अमला !!!
कविता सामाजिक बदलाव के कामों में अपने शुरुआती दिनों में ही एक बात समझ में आ गई थी कि औपनिवेशिक गुलामी की मानसिकता को अपने सिर पर ढो रहे हमारे देश में एक स्त्री के लिए यह राह कितनी जोखिम भरी हो सकती...
View Articleलगातार दबाव के बाद पुलिस ने फोन करके धमकाने वाले को पकड़ा
कविताजनसंगठनों और मीडिया के लगातार दबाव के बाद पुलिस ने बारह दिन तक स्त्री मुक्ति लीग के फोन नंबर पर फोन करके मुझे अश्लील फ़ब्तियां करने वाले और अन्य महिला साथियों को धमकी देने वाले को आज पकड़ लिया...
View Articleमनुष्य के भौतिक अस्तित्व और चेतना का आधार
जिन पूर्वाधारों से हम शुरुआत कर रहे हैं वो यादृच्छिक (मनमाने ढंग से निर्धारित) नहीं हैं, जड़-सूत्र नहीं हैं, बल्कि वास्तविक पूर्वाधार हैं जिनसे अमूर्तन सिर्फ कल्पना में ही किया जा सकता है। वे...
View Articleशिशिर-सिम्फ़नी-2000
(अम्मा को सम्बोधित)उस दिन मैंने देखा तुमकोएक लम्बे समय बादऔर सोचा यूँ पहुँचती है समापन तकएक अजेय शौर्यगाथाऔर पृथ्वी के गर्भ मेंअनवरत सुलगती रहती हैदर्द की कोई अकथ कथा,यूँ बीतता है शीतकाल,और बसन्त भीऔर...
View Articleमानव इतिहास में विकास का नियम
जैसे कि जैव प्रकृति में डार्विन ने विकास के नियम का पता लगाया था, वैसे ही मानव इतिहास में मार्क्स ने विकास के नियम का पता लगाया था। उन्होंने इस सीधी-सादी सच्चाई का पता लगाया - जो अबतक विचारधारा की...
View ArticleArticle 8
विचारों को मनुष्य क्रियान्वित करते हैं!विचारहमें एक पुरानी विश्व-व्यवस्था से कभी भी आगे नहीं ले जा सकते, बल्कि केवल पुरानी विश्वव्यवस्था के विचारों से आगे ले जाते हैं।विचार किसी चीज़ को किसी भी...
View Articleदीपांकर चक्रवर्ती (1941-2013): देर से एक श्रद्धांजलि
कॉमरेड दीपांकर चक्रवर्ती नहीं रहे। गत 27 जनवरी 2013 को कोलकाता में तेघरिया स्थित आवास पर दिल का दौर पड़ने से उनका निधन हो गया।शोकाकुल करने वाली यह सूचना जब हम लोगों को मिली, तब हम लोग एक दूसरी आपदा का...
View Articleशालिनी के साथ दिन-रात
लगभग एक महीने का समय मेरे लिए दु:ख और उदासी के साथ-साथ अदम्य जिजीविषा और युयुत्सा का साक्षी होने का एक विचित्र दौर रहा है। इन दिनों ने मुझे जि़न्दगी से प्यार, मृत्यु के प्रतिरोध, उसूलों के प्रति...
View Article'पहल' का फरवरी अंक
(जागरूक नागरिक मंच की सांस्कृतिक मासिक दीवार पत्रिका 'पहल' का फरवरी अंक)
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